vridhi aur vikas

                                                           वृद्धि और विकास 
वृद्धि और विकास:

वृद्धि ;बालक के शारीरिक आकर  में होने वाले मात्रात्मक परिवर्तन को वृद्धि कहते है !
विकास :बालक में होने वाली विभिन्न योग्यताओं एवं कौशलों के अर्जन को विकास कहते हैं !
              उदहारण: बोलना,सीखना,अपने मनोभावों को व्यक्त करना,सर तथा शरीर के अन्य भागों के सञ्चालन को सीखना !
वृद्धि और विकास साथ साथ  चलते हैं पर इनकी चने की गति प्रत्येक बालक में भिन्न  होती है !
  वृद्धि की विशेषताएँ :
  • वृद्धि का सम्बन्ध अकार,ऊंचाई तथा भर से संबन्धित है!
  • वृद्धि को नापा जा सकता है !
  • वृद्धि सीमित होती है !इसका आरम्भ जन्म से शारीरिक परिपक्वता के उच्च स्तर  तक हो सकता है !
  • वृद्धि शरीर के कुछ सीमित भागों तक ही बद्ध  होती है !
  • वृद्धि को विकास का एक पक्ष माना जाता है !
विकास की विशेषताएँ :

  • शारीरिक प्रक्रियाओं में गत्यात्मक सुधार को विकास कहते हैं !
  • इसके अंतर्गत व्यवहारातमक परिवर्तन आते हैं जिनको हम नाप  नहीं सकते !
  • विकास सतत प्रक्रिया है यानि की कभी न ख़तम होने वाली ,यह जीवन पर्यन्त तक चलती है !
  • यह शरीर के किसी एक अंग तक ही सीमित नहीं होता है ,पूरे शरीर को एक संपूर्ण संगठन के रूप में देखता है !
  • विकास बहुत ही विस्त्रत और व्यापक प्रक्रिया है !यह अधिगम और परिपक्वता से सीधा सम्बन्ध रखता है !यद्यपि यह प्राकर्तिक और सहज प्रक्रिया है परन्तु ये पर्यावरण से अत्यधिक त्वरित एवं प्रभित होती है !











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